Educational Psychology Quiz

बुद्धि-लब्धि के सूत्र का प्रतिपादन किया-

बुद्धि-लब्धि के सूत्र का प्रतिपादन किया-

बुद्धि-लब्धि के सूत्र का प्रतिपादन किया-

Educational Psychology से संबन्धित अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

सीखने का सम्बन्ध-सिद्धान्त किस मनोवैज्ञानिक ने दिया?
शिक्षा मनोविज्ञान की आत्म दर्शन विधि के प्रवर्तक कौन थे?
‘‘बुद्धि जीवन की नवीन समस्याओं एवं जीवन की परिस्थितियों के समाधान करने की सामान्य मानसिक योग्यता है।‘‘ यह परिभाषा किस विद्वान द्वारा दी गई है-
थार्नडाईक द्वारा दिये गए सीखने के नियमों में से मुख्य नियम कौनसा नहीं है?
कौनसा गुण बहिर्मुखी व्यक्तित्व के अन्तर्गत नहीं आता ?
थार्नडाईक द्वारा दिये गए सीखने के नियमों में से गौण नियम कौनसा नहीं है?
मनोविज्ञान को सर्वप्रथम Psychology नाम किसने दिया था?
द्वि-खण्ड बुद्धि-सिद्धान्त का श्रेय किसको है-
निम्न में से किस विधि को Laboratory Method भी कहते हैं?

बुद्धि-लब्धि के सूत्र का प्रतिपादन किया, buddhi labdhi ke surt ka pratipadan kisne kiya, बिने ने, bine ne, स्टर्न ने, starn ne, टरमैन ने, tarman ne, जाॅनसन ने, jhonsan ne, jonsan ne,Child Pedagogy बुद्धि का, वुडवर्थ के अनुसार बुद्धि की परिभाषा… … बुद्धि – लब्धि को ज्ञात करने का सर्वप्रथम सूत्र किस मनोवैज्ञानिक ने दिया है? … 16. बुद्धि ओर विकास पूरक है – एक – दुसरे के । 17. वर्नन. ने किस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया? क्रमिक महत्व सिद्धान्त का , बुद्धि लब्धि मापन का सूत्र है— मानसिक आयु एक ऐसा संप्रत्यय (Concept) है जिसके द्वारा व्यक्ति की बुद्धि का मापन किया जाता है. इस संप्रत्यय का प्रतिपादन बिने (Binet) तथा साइमन (Simon) द्वारा किया गया. व्यक्ति की … बुद्धि लब्धि (Intelligence Quotient)—बुद्धि मापने के लिए सर्वप्रथम परीक्षण का निर्माण बिने तथा साइमन (Binet & Simon) ने 1905 में किया. इस परीक्षण में सबसे, CTET Class 8 – बुद्धि – EyesUnit- CTET/UPTET/UP Govt. Exam, बुद्धि के सिद्धान्त. एक कारक सिद्धान्त (One Factor Theory) – इस सिद्धान्त का प्रतिपादन बिने (Binet) ने किया। … सर्वप्रथम विलियम स्टर्न बुद्धि के मापन के लिए बुद्धि-लब्धि (IQ) के प्रयोग का सुझाव दिया। टर्मन ने … बुद्धि-लब्धि का सूत्र, बालक की बुद्धि निकालने के लिए हम उपरोक्त सूत्र का प्रयोग करते हैँ। उदाहरण के लिए मानसिक आयु 12 वर्ष व वास्तविक आयु 10 वर्ष है तो बुद्धि लब्धि 12/10×100 होगी अर्थात 120 होगी।

टरमन (Terman) नामक मनोवैज्ञानिक ने बुद्धि लब्धि, बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र – Child Development, pedagogy, बुद्धि के भिन्न पक्षों के लिए सही है द) सही है. 9. … 3) भौतिक संरचना 4) जन्म-जात. 2. गिलफोर्ड ने ‘अभिसारी चिंतन’ पद का प्रयोग किसके समान अर्थ में किया है – 1) बुद्धि …. फ्रायड; जीन पियाजे; विलिं जेम्स; फ्रोबेल; सामाजिक अधिगम सिंद्धांत का प्रतिपादन किया –; वाटसन; जीन पियाजे; अल्बर्ट बन्दुरा; कोहलर; ‘मनोविज्ञान … (3) बुद्धि लब्धि का सूत्र – स्टर्न., बुद्धिलब्धि एवं उसका मापन व बुद्धि परीक्षण के प्रकार, बुद्धिलब्धि एवं उसका मापन, मानसिक आयु, बुद्धिलब्धि निकालने की विधि, बुद्धि परीक्षण के. बुद्धिलब्धि का अर्थ:- बुद्धिलब्धि, बालक या व्यक्ति की सामान्य योग्यता के विकास की गति बताती है। … बुद्धि लब्धि निकालने का सूत्र – …, वितरणों के मध्य में आने वाले बिन्दु को कहते हैं— (A) मध्य (B) माध्यिका (C) बहुलक (D) मध्यमान . मध्य (Mean) का सूत्र … किसने विकसित किया ? (A) फिलपोट्रिक (B) टर्मन (C) बिनेट एवं सायमन (D) उपर्युक्त सभी बुद्धिलब्धि ज्ञात करने का सूत्र क्या है ?
amiell (1996) notes that if mentioned at all, Stern is known as “the IQ guy,” which in one sense is true enough. He was indeed the one who invented the formula for the intelligence quotient:

IQ=100\dfrac{\text{Mental Age}}{\text{Chronological Age}}

What is not typically mentioned is that he was a little embarrassed by his IQ idea and would have been happy if his name were not associated with it (Lamiell, 2003, p. 1). He wrote movingly about how IQ tests should not be used to degrade individuals (Stern, 1933, as cited in Lamiell, 2003):

Under all conditions, human beings are and remain the centers of their own psychological life and their own worth. In other words, they remain persons, even when they are studied and treated from an external perspective with respect to others’ goals….Working “on” a human being must always entail working “for” a human being….The psychotechnician has every good reason to take these considerations seriously. Because if there are places today where the term “psychotechnician” is uttered with something of a disdainful tone, that is due to the implicit or explicit belief that psychotechnicians not only intercede but interfere in the lives and rights of the individuals they deal with. The feeling is that psychotechnicians degrade persons by using them as a means to others’ ends. (pp. 54–55)

Stern wrote extensively about a wide variety of issues about intelligence, personality, individuality, and many other topics. It irked him that the IQ formula was the idea that caught on. Fortunately, scholars are beginning to remember Stern as more than just “The IQ guy.”

Stern’s Humanism & the Limits of Science

Stern used intelligence tests and other scientific approaches to understand people but also wanted to be clear about the limits of such approaches. His work did not constitute a romantic rejection of science but rather a clear-headed delineation of its proper boundaries. In arguably the first book on the psychology of individual differences, Stern (1900, as cited in Lamiell, 2003) provides this thought, which, provided suitably tasteful graphic design, should probably be made into framed posters that psychologists who cherish individuality can hang in their offices:

[E]very individual is a singularity, a one-time existing being, nowhere else and never before present. To be sure, certain law-like regularities apply to him, certain types are embodied in him, but the individual is not exhausted by these laws and types; there remains ever something more, through which the individual is distinct from others who conform to the same laws and types. And this last kernel of being, which reveals the individual to be thus and so, distinct from all others, is not expressible in the language of scientific concepts, it is unclassifiable, incommensurable. In this sense, the individual is a limiting concept, toward which theoretical investigation strives but can never reach; it is, one could say, the asymptote of science. (pp. 15-16)

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