निःशस्त्रीकरण की घोर असफलता

निःशस्त्रीकरण की घोर असफलता

निःशस्त्रीकरण की शर्त न केवल जर्मनी पर भी समस्त राष्ट्रों पर लागू की जानी चाहिये थी । जर्मनी के ज्ञापन में संधि-पत्र की। धारा को निकालने की बात कही गयी थी, जिसके अनुसार युद्ध शुरू करने के उत्तरदायित्व जर्मनी पर डाला गया था।

जर्मनी के विरोध

मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी के विरोध पत्र पर विचार करने के बाद संधि की शो। सामान्य परिवर्तन किये और संशोधित संधि पत्र जर्मनी को भेज दिया गया और पाँच दिन का समय देते हुए कहा कि यदि उसने इस अवधि में उसे स्वीकार नई किया तो उस पर आक्रमण कर दिया जायेगा । इस कार्य ने आग में घी का कार किया और जर्मनी में चारों ओर क्षोभ की लहर फैल गयी । संधि की शर्ते इतनी कोर पी कि इसे स्वीकार करने की अपेक्षा जर्मनी के बहुत से नागरिक मित्र राष्ट्र के विरुद्ध लड़ते हुए नष्ट हो जाना अधिक श्रेयस्कर समझते थे । किन्तु महासेनापति हिन्डनबर्ग ने स्पष्ट कर दिया कि मित्र राष्ट्रों के विरुद्ध लड़कर जीतना असम्भव है। प्रधानमंत्री शीडमेन ने संधि को अस्वीकार करते हुए त्याग पत्र दे दिया। अन्त में नवगठित सरकार ने, जिसमें गुस्टावबौर प्रधानमंत्री तथा मूलर विदेशमंत्री थे, संधि पर हस्ताक्षर करना स्वीकार कर लिया ।

जर्मनी के साथ संधि

जर्मन प्रतिनिधि जब अन्तिम बार, 28 जून, 1919 को हस्ताक्षर करने वर्साय महल आये तो उन्हें पहले की भाँति है अपमानित होना पड़ा । उन्हें बन्दियों की भांति रखा गया । मित्र राष्ट्रों ने या निश्चय किया कि जर्मनी के साथ संधि पर हस्ताक्षर वर्साय के उसी राजप्रासाद शीशमहल में हो, जहाँ फ्रॉस को हराने के बाद 1871 ई. में प्रशा के राजा को का का सम्राट घोषित किया था। इस अपमान का पँट भी प्रतिनिधियों को पीना पका जर्मनी की ओर से हर्मन मूलर तथा जोहानसबेल ने संधि पर हस्ताक्षर किये। नर्माण की संधि की शर्ते- वर्साय की संधि 15 भागों में विभक्त थी और उस 440 अनुच्छेद थे । जैसा पहले बताया जा चुका है कि उसके प्रथम भाग में राष्ट्र की स्थापना, संगठन एवं कार्यों का उल्लेख किया गया था।

(क) प्रादेशिक व्यवस्थाएँ()

जर्मनी को अल्सेस-लॉरेन के प्रान्त झाँस को देने पड़े। की की सीमा पर स्थित मेलमिडे और यूपेन बेल्जियम को दे दिये गये। खनिज पदार्थों से अति-सम्पन्न सार घाटी दोहन हेतु 15 वर्षों के लिए फ्राँस गई। किन्तु सार-प्रदेश पर नियंत्रण राष्ट्रसंघ का स्थापित किया गया और शासन चलाने के लिए एक आयोग नियुक्त किया गया । 15 वर्ष बाद संग्रह द्वारा यह निर्णय होना था कि सारवासी फ्रांस के साथ मिलना चाहते या जर्मनी के साथ या राष्ट्रसंघ के शासन में रहना चाहते है।

श्लेसविग में जनमत संग्रह

जर्मन अधिकृत श्लेसविग में जनमत संग्रह किया गया । उसके आधार पर उत्तरी लेसविग डेनमार्क को दिया गया और दक्षिणी श्लेसविग जर्मनी के पास जर्मनी को पूर्वी सीमा पर सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा । मित्र राष्ट्रों ने पद समाप्ति के बाद एक स्वतंत्र पोलैण्ड के निर्माण का निश्चय किया था । विल्सन के चौदह सूत्रों में भी स्वतंत्र पोलैण्ड के निर्माण का उल्लेख किया गया था । अतः पेरिस सम्मेलन में जर्मनी, आस्ट्रिया और रूस के पोल क्षेत्रों को लेकर स्वतंत्र पोलैण्ड का निर्माण किया गया । पोसेन के प्रान्त का 5/6 भाग तथा पश्चिमी प्रशा का अधिकांश भाग पोलैण्ड को प्राप्त हुआ । इसके अतिरिक्त उत्तरी साइलेशिया का एक बड़ा भाग जनमत-संग्रह के आधार पर पोलैण्ड को दे दिया गया । पोलैण्ड के नवनिर्मित राज्य का समुद्र तट से सम्बन्ध स्थापित करने के लिए जर्मनी को डेन्जिग का बन्दरगाह राष्ट्रसंघ के संरक्षण में छोड़ना पड़ा । डेन्जिग के चारों ओर का 700 वर्ग मील का क्षेत्र मिलाकर उसे स्वतंत्र नगर घोषित किया गया और उसका शासन चलाने के लिए राष्ट्रसंघ द्वारा एक आयुक्त की व्यवस्था की गयी।

(vi) जर्मनी को बाल्टिक सागर तट पर स्थित मेमल का बन्दरगाह इसलिए राष्ट्रसंघ को सौपना पड़ा ताकि लिथुआनिया को स्थानान्तरित किया जा सके।
(vii) नवनिर्मित राज्य-बेल्जियम, पोलैण्ड और चेकोस्लोवाकिया की स्वतंत्रता और प्रभुसत्ता को जर्मनी ने मान्यता दी ।
(viii) जर्मनी ने चेकोस्लोवाकिया को ऊपरी साइलेशिया का एक छोटा-सा क्षेत्र भी हस्तान्तरित किया ।
(ix) जर्मनी को समुद्रपार के अपने विस्तृत उपनिवेशों पर सारे अधिकार मित्र राष्ट्री को देने के लिए विवश किया गया और वे उपनिवेश ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, आस्ट्रिया, न्यूजीलैण्ड, दक्षिण अफ्रीका और बेल्जियम को आपस में बाँट दिये गए।

पान का क्याओ-चाओ और शाण्टुंग प्रान्त में जर्मनी की बस्तियों पट्टे पर दी गई। पूजालण्ड को सैमोआ दीप का जर्मन-भाग दिया गया। इंग्लैण्ड को पश्चिम अफ्रीका जर्मन भाग मिला | कैमरुन और टोगालैण्ड को फ्रांस और इंग्लैण्ड ने आपस में या जर्मन अधिकत दक्षिण-पश्चिम अफ्रीका का प्रदेश दाक्षण अफ्राका का सौपा गया।

(x) जर्मनी ने चीन, थाइलैण्ड, मित्र, मोरक्को आर लिया और विशेष सुविधाएँ भी छोड़ना स्वीकार किया | मित्र राष्ट्रों ने समुद्र पार वाले जर्मन नागरिकों तथा कम्पनियों की सारी सम्पत्ति, अधिकार और रखने तथा बेचने का अधिकार अपने हाथ में ले लिया । बुल्गारिया और ना जर्मनी की सम्पत्ति और सुविधाएँ जब्त कर ली गई।
(xi) बेस्ट लिटोवस्क सनिा के द्वारा जर्मनी ने एक बड़ा भाग रूस से ही अपने राज्य में मिला लिया था । किन्तु वर्साय की सन्धि द्वारा इस विस्तृत प्रदेश सैटविया, एस्टोनिया और लिपुलानिया की स्थापना की गयी।

(ब) सैनिक व्यवस्थाएँ

() जर्मनी में अनिवार्य सैनिक सेवा समाप्त कर दी गयी।

(ii) जर्मनी की स्थल सेना की संख्या अधिकारियों सहित एक लाख निर्धारित की गयी । यह भी व्यवस्था की गयी कि अधिकारियों को कम से कम 25 वर्ष और साधारण सैनिकों को कम से कम 12 वर्ष सेना में रहना पड़ेगा । यह व्यवस्था इसलिए की गयी ताकि अधिक व्यक्ति सैनिक शिक्षा न ले सके।

(ii) जर्मनी में अस्त्र-शस्त्र, गोला-बास्द आदि के उत्पादन को अत्यन्त सीमित कर दिया गया तथा उसे इन वस्तुओं को आयात करने की मनाही कर दी गई।

(iv) राइन नदी के पूर्वी तट पर जर्मनी को किलेबन्दी करने की आज्ञा नहीं दी गई और उसके पश्चिमी तट पर 50 किलोमीटर क्षेत्र का विसैन्यीकरण कर दिया गया । उस क्षेत्र में उसके सभी किलों को तोड़ दिया गया।

(v) जर्मनी को किसी भी प्रकार की वायुसेना रखने का भी निषेध कर दिया गया
(vi) जर्मनी की नो-सैनिक शक्ति को भी सीमित किया गया । जर्मनी कुल 6 युद्धपोत, 6 लड़ाकू विमान, 12 तोपची जहाज और टारपीडो नावें ही रख सकता था । उसे एक भी पनडुब्बी रखने की इजाजत नहीं थी । उसे समुद्री सेना में अधिकारियों समेत 15,000 सैनिक रखने की ही इजाजत दी गयी ।

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